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Failte Shahar, Ghathti Zamin, Badhti Pareshani...By ugesh sarkar, Section News
एनसीआर को बिजनेस के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ माना जाने लगा है। जो कंपनियां कभी मुंबई और देश के दूसरे प्रदेशों को पसंद करती थीं, अब उनके मुख्यालय एनसीआर में खुलने लगे हैं। विकास की बढ़ती रफ्तार के साथ एनसीआर में जमीनों का अधिग्रहण भी तेजी से हो रहा है। यह बहस छिड़ने लगी है कि आने वाले दिनों में गौतमबुद्धनगर जिले को सब्जियों, अनाज, दूध और फल के लिए कहीं दूसरे जिलों पर न निर्भर होना पड़े। यह मसला आम लोगों के दिमाग में है, लेकिन सरकार इसको लेकर गंभीर नहीं है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि आने वाले दिनों में यहां रोजमर्रा की चीजें काफी महंगे दामों पर मिलेंगी। यहां प्रतिवर्ष तकरीबन 1 हजार हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण हो रहा है।
किसान प्रतिरोध आंदोलन चला रहे सरदाराम भाटी का कहना है कि दिल्ली के आसपास के एरिया में भूमि अधिग्रहण जोरों पर चल रहा है। गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर की कई तहसीलों में भी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। बिल्डिंगें तो बन ही रही हैं अच्छा खासा एरिया एक्सप्रेस-वे और हाइटेक सिटी बसाने के लिए अधिग्रहित किया जा रहा है। यमुना एक्सप्रेस-वे और ईस्टर्न पेरिफेरल के लिए भी कई हजार एकड़ जमीन एक्वायर की जानी है। दादरी, सिकंदराबाद, जेवर, खुर्जा, दनकौर में भारी मात्रा में सब्जी और अनाज की खेती होती है लेकिन यहां की जमीनें तेजी से अधिग्रहित हो रही हैं। इसी इलाके से दिल्ली वालों को भी भारी मात्रा में दूध की सप्लाई की जाती है। बुलंदशहर की तरफ यूपीएसआईडीसी ने पैर फैलाने शुरू कर दिए हैं। भूमि अधिग्रहण होने के बाद यहां कृषि भूमि जमीन लगभग खत्म हो जाएगी। पशुओं के चरने के लिए भी जगह नहीं बचेगी। किसानों का कहना है कि सरकार इसका विकल्प तैयार करने के बारे में नहीं सोच पा रही है।
कहीं दूध और सब्जी के लिए न तरस जाएं दिल्ली वाले Source: Navbharat Times फैलते शहर, घटती जमीन, बढ़ती परेशानी
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